एक देश बारह दुनिया : हाशिये पर छूटे भारत की सच्ची तस्वीर

 


एक देश बारह दुनिया 

लेखक: शिरीष खरे

परिचय

भारत को अक्सर महानगरों, चमकती सड़कों, तेज़ रफ्तार विकास और आधुनिक जीवनशैली के माध्यम से देखा जाता है, लेकिन इस देश का एक दूसरा चेहरा भी है जो गाँवों, आदिवासी इलाकों, किसानों, मजदूरों और वंचित समुदायों के बीच बसता है। "एक देश बारह दुनिया" इसी अनदेखे भारत की कहानी कहती है। वरिष्ठ पत्रकार शिरीष खरे द्वारा लिखी गई यह पुस्तक उन लोगों की आवाज़ को सामने लाती है जिन्हें अक्सर मुख्यधारा की चर्चाओं में स्थान नहीं मिलता।

यह पुस्तक बारह विस्तृत रिपोर्ताजों का संग्रह है, जिनमें लेखक ने वर्षों तक देश के दूर-दराज़ क्षेत्रों में जाकर लोगों के जीवन, संघर्ष, आशाओं और चुनौतियों को नज़दीक से समझने और प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। यह केवल रिपोर्टों का संग्रह नहीं बल्कि भारत के उस वास्तविक स्वरूप का दस्तावेज़ है जो विकास और आधुनिकता की दौड़ में पीछे छूटता दिखाई देता है।



पुस्तक की विशेषता

पुस्तक की प्रस्तावना में लेखक बताते हैं कि इसमें भारत की वह तस्वीर उभरती है जो अक्सर छिपा दी जाती है। इसमें उन समुदायों की कहानियाँ शामिल हैं जिन्हें विकास, आधुनिकता और परिवर्तन के नाम पर बार-बार हाशिये पर धकेला गया है। लेखक के अनुसार यह पुस्तक अलग-अलग दुनियाओं में रहने वाले लोगों के दुःख, संघर्ष, प्रेम, खुशियों और उम्मीदों का दस्तावेज़ है।

साल 2008 से 2017 के बीच पत्रकारिता के दौरान देश के दुर्गम क्षेत्रों में किए गए अध्ययन और रिपोर्टिंग के आधार पर यह पुस्तक तैयार की गई है। लेखक ने केवल घटनाओं को दर्ज नहीं किया बल्कि लोगों के अनुभवों, भावनाओं और सामाजिक वास्तविकताओं को भी गहराई से समझने का प्रयास किया है।


पुस्तक में शामिल प्रमुख अध्याय

इस पुस्तक में कुल बारह महत्वपूर्ण रिपोर्ताज शामिल हैं, जिनमें प्रमुख हैं—

  • वह कल मर गया
  • पिंजरनुमा कोठरियों में ज़िन्दगी
  • अपने देश के परदेसी
  • कोई सितारा नहीं चमकता
  • गन्नों के खेतों में चीनी कड़वी
  • सूरज को तोड़ने जाना है
  • मीराबेन को नींद नहीं आती
  • वे तुम्हारी नदी को मैदान बना जाएंगे
  • सुबह होने में देर है
  • दण्डकारण्य यूँ ही लाल नहीं है
  • खंडहरों में एक गाइड की तलाश
  • धान के कटोरे में राहत का धोखा

ये सभी अध्याय भारत के अलग-अलग हिस्सों की सामाजिक, आर्थिक और मानवीय परिस्थितियों को सामने लाते हैं।


लेखक परिचय

शिरीष खरे पिछले दो दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण भारत, वंचित समुदायों और सामाजिक मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है। उनकी अनेक रिपोर्टें राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित हुई हैं और उन्हें भारतीय पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए कई सम्मान प्राप्त हुए हैं।

ग्रामीण भारत की वास्तविक समस्याओं और वहाँ के लोगों की जीवन परिस्थितियों को समझने और समाज के सामने रखने में उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है। उनकी लेखनी संवेदनशील होने के साथ-साथ तथ्यात्मक और गहन अध्ययन पर आधारित है।


यह पुस्तक क्यों पढ़ें?

यदि आप भारत के वास्तविक सामाजिक ढाँचे, ग्रामीण जीवन, आदिवासी क्षेत्रों, किसानों की समस्याओं, विकास के प्रभाव और हाशिये पर खड़े समुदायों की सच्चाई को समझना चाहते हैं, तो "एक देश बारह दुनिया" आपके लिए एक महत्वपूर्ण पुस्तक है।

यह पुस्तक केवल जानकारी नहीं देती, बल्कि पाठक को सोचने के लिए भी प्रेरित करती है कि एक ही देश में रहने वाले लोगों की दुनिया कितनी अलग-अलग हो सकती है।


निष्कर्ष

एक देश बारह दुनिया भारत के उस चेहरे को सामने लाती है जिसे अक्सर आँकड़ों और बड़ी खबरों के पीछे छिपा दिया जाता है। शिरीष खरे की यह पुस्तक पत्रकारिता, समाजशास्त्र, ग्रामीण भारत और समकालीन भारतीय समाज को समझने के इच्छुक पाठकों के लिए एक मूल्यवान दस्तावेज़ है। यह पुस्तक हमें याद दिलाती है कि भारत को समझने के लिए केवल शहरों को नहीं, बल्कि उन लोगों को भी देखना आवश्यक है जो देश की असली नींव हैं।

Kitabokiduniya

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